क्रिस्टलीकरण द्वारा अशुद्ध नमूने का शोधन

हमारा उद्देश्य:

हमारा उद्देश्य क्रिस्टलीकरण के माध्यम से निम्नलिखित पदार्थों के अशुद्ध नमूने से उनका क्रिस्टल तैयार करना है;

  1.  कॉपर सल्फेट
  2. पोटाश फिटकिरी
  3.  बेंजोइक एसिड

सिद्धांत 

विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन शुद्ध, किसी भी प्रकार की अशुद्धियों से पूरी तरह से मुक्त  होना चाहिए।  पदार्थ की शुद्धिकरण की विधि उसमें मौजूद अशुद्धियों की प्रकृति पर निर्भर करती है। पदार्थों की शुद्धि के लिए विभिन्न तरीके हैं, जैसे, फिल्टरेशन, वाष्पीकरण, छानना, डिस्टिलेशन और क्रिस्टलीकरण । क्रिस्टलीकरण बहुत महत्वपूर्ण शुद्धिकरण तकनीकों में से एक है। यह अवांछित सह उत्पादों को हटाकर पदार्थों का शुद्धिकरण करता है। क्रिस्टलीय यौगिक (कंपाउंड) आम तौर पर इस क्रिस्टलीकरण प्रक्रिया के माध्यम से साफ किए जाते हैं।

क्रिस्टलीकरण के पीछे यह सिद्धांत है कि विलायक द्वारा घोले जा सकने वाले घुलने वाले पदार्थ की मात्रा तापमान के साथ बढ़ती है।

क्रिस्टलीकरण में, अशुद्ध पदार्थ कमरे के तापमान की तुलना में उच्च तापमान पर अपने निकटवर्ती संतृप्त विलयन तक पहुंचने के लिए उपयुक्त विलायक में घुल जाता है। इस उच्च तापमान पर, घुलने वाले पदार्थ की उस विलायक में बहुत उच्च घुलनशीलता होती है, इसलिए कमरे के तापमान पर विलायक की तुलना में घुलने वाले पदार्थ को घोलने के लिए गर्म विलायक की बहुत थोड़ी सी मात्रा की आवश्यकता होती है। विलयन ठंडा होने पर शुद्ध पदार्थ कस क्रिस्टाल बन जाता है। पीछे बचे रह जाने वाले विलयन को मदर लिकर कहा जाता है। सभी अशुद्धियां मदर लिकर में पीछे बची रह जाती हैं। शोधन विधि यौगिक (कंपाउंड)  और अशुद्धता के बीच घुलनशीलता में अंतर पर निर्भर करती है।

क्रिस्टलीकरण प्रक्रिया में शामिल बुनियादी चरण ;

विलायक और घुलने वाले पदार्थ का चयन

उचित विलायक का चयन क्रिस्टलीकरण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है क्योंकि क्रिस्टलीकरण केवल तभी काम करता है जब उचित विलायक का प्रयोग किया जाता है। कमरे के तापमान पर पदार्थ न घोलने वाले विलायक का चयन करना महत्वपूर्ण है। लेकिन जैसे-जैसे विलायक का तापमान बढ़ता है घुलने वाले पदार्थ की घुलनशीलता भी बढ़ जाती है। साथ ही मौजूद अशुद्धियां या तो कमरे के तापमान पर विलायक में घुलनशील होनी चाहिए या उच्च तापमान पर विलायक में अघुलनशील होनी चाहिए। जब विघटन किया जाता है अगर विलायक गर्म नहीं होता है, तो बहुत ज्यादा विलायक इस्तेमाल होता है जिससे कम उपज मिलती है।

विलायक में घोला जाना वाला पदार्थ घोलना

नमूना गर्म करते हुए अशुद्ध नमूने और उबलते हुए चिप्स से युक्त बीकर में विलायक का थोड़ा सा हिस्सा मिलाएं। धीरे-धीरे सामग्री चलाएं। विलायक के क्वाथनांक (बायलिंग प्वाहइंट) पर संतृप्त विलयन प्राप्तग करने के लिए घोला जाने वाला पदार्थ घोलने के लिए पर्याप्त विलायक मिलाएं। अगर बहुत ज्यादा विलायक का प्रयोग किया जाता है, तो पदार्थ की रिकवरी कम हो जाती है।

गर्म विलयन की छनाई

अगर गर्म विलयन में अघुलनशील अशुद्धियां होती हैं, तो इसे छनाई की प्रक्रिया से हटाया जा सकता है। इस प्रक्रिया के लिए,  कीप में फिल्टर पेपर कोन रखें और इसे कीप के अंदर ठीक से लगाने के लिए पानी के छिड़काव से फिल्टर पेपर गीला करें। कीप स्टैंड पर कीप रखें और कीप के नीचे चाइना डिश रख दें।

ध्यान दें: विलयन के छींटे उठने से बचने के लिए कीप का तना चाइना डिश की दीवार को छूना चाहिए।

छने हुए पदार्थ का क्रिस्टलीकरण

छने हुए पदार्थ का सांद्रण (कंसनट्रेशन) करने के लिए, लगातार चलाते हुए धीरे छने हुए पदार्थ से युक्त चाइना डिश गर्म करें। ऐसा एकसमान वाष्पीकरण सुनिश्चित करने और ठोस पपड़ी का निर्माण रोकने के लिए किया जाता है। विलयन की मात्रा  घटकर आधी हो जाने पर सांद्रित विलयन में कांच की छड़ का एक छोर डुबोएं और बूंद फूंक कर ठंडा करें।  पतली पपड़ी के निर्माण से पता चलता है कि क्रिस्टलीकरण बिंदु प्राप्त हो गया है।

सांद्रित विलयन ठंडा करना

एक बार यह निर्धारित हो जाने पर कि विलयन यौगिक (कंपाउंड) से संतृप्त हो गया है, इसे कमरे के तापमान पर धीरे-धीरे ठंडा होने दिया जाता है।

सांदित विलयन ठंडा करने के लिए क्रिस्टयल बनाने वाली डिश में विलयन डालें और छेडें नहीं। जब विलयन ठंडा हो जाता है, तो क्रिस्टल अलग हो जाते हैं।कमरे के तापमान पर नमूना ठंडा हो जाने पर, क्रिस्टलीकरण पूरा करने के लिए इसे आइस बॉथ में या ठंडे पानी में रखें।

अगर क्रिस्टलीकरण तुरंत नहीं होने लगता है, तो  सीड क्रिस्टल मिलाएं या कांच की छड़ से सांदि्त विलयन वाले बर्तन के अंदर खुरचें।

क्रिस्टल अलग करना और सुखाना

 बनने वाले क्रिस्टल या तो मदर लिकर से छानकर या छनाई की प्रक्रिया द्वारा अलग किण्‍ जाते हैं। ठंडे पानी या अल्कोहल से क्रिस्टल धोएं। फिल्टर पेपर की शीटों के बीच में रखकर क्रिस्टल सुखाए जा सकते हैं। इन्हें  छिद्रित प्लेट पर फैलाकर  या निर्वात डेजीक्केटर में क्रिस्टल रखकर भी सुखाया जा सकता है। क्रिस्टलों की  निश्चित ज्यामिति, और इसलिए निश्चित आकार होता है।

 

 

Cite in Scientific Research:

Nedungadi P., Raman R. & McGregor M. (2013, October). Enhanced STEM learning with Online Labs: Empirical study comparing physical labs, tablets and desktops. In Frontiers in Education Conference, 2013 IEEE (pp. 1585-1590). IEEE.

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